Home Buy Decision or Live on Rent, Which one you should Prefer?
Flat या apartment खरीदने (buy) या किराए पर लेने (rent) का निर्णय आपकी आर्थिक स्थिति, जीवनशैली और व्यक्तिगत लक्ष्यों पर निर्भर करता है। आइए इसे समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान दें:
1. वित्तीय स्थिति और बजट
खरीदने के लिए:
EMI Calculation: सुनिश्चित करें कि आपकी मासिक EMI आपकी मासिक आय का 30-40% से अधिक न हो।
Down Payment: क्या आपके पास डाउन पेमेंट के लिए पर्याप्त बचत है?
अतिरिक्त खर्च: प्रॉपर्टी टैक्स, मेंटेनेंस, इंटीरियर, रजिस्ट्रेशन आदि पर होने वाले खर्च का ध्यान रखें।
किराए पर रहने के लिए:
किराया आमतौर पर आपकी मासिक आय का 20-25% होना चाहिए।
अगर किराया खरीदने के EMI से काफी कम है, तो आप निवेश करके लंबे समय में अधिक धन कमा सकते हैं।
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2. निवेश बनाम घर का मूल्य
Rent पर रहकर निवेश:
अगर आप किसी ऐसे शहर में रहते हैं जहाँ प्रॉपर्टी की कीमतें बहुत तेजी से नहीं बढ़ रहीं, तो किराए पर रहकर बचत को SIP, म्यूचुअल फंड, या अन्य संपत्तियों में निवेश कर सकते हैं।
निवेश पर मिलने वाला रिटर्न (10-12%) अक्सर घर की कीमत में होने वाले वार्षिक वृद्धि (4-7%) से ज्यादा हो सकता है।
EMI भरकर खरीदना:
अगर आप उस घर में लंबे समय तक (8-10 साल या अधिक) रहने का प्लान कर रहे हैं, तो खरीदने पर विचार करें।
घर की कीमत बढ़ने के साथ-साथ यह एक संपत्ति बन जाती है।
3. लाइफस्टाइल और स्थायित्व
खरीदने के लिए:
अगर आप स्थायी रूप से एक जगह रहना चाहते हैं और लंबे समय के लिए एक घर का सपना देखते हैं, तो खरीदना बेहतर है।
यह आपके परिवार को स्थायित्व और सुरक्षा देता है।
किराए पर रहने के लिए:
अगर आपकी नौकरी ऐसी है जहाँ ट्रांसफर या शहर बदलने की संभावना है, तो किराए पर रहना सुविधाजनक हो सकता है।
यह लचीलापन देता है और आपको किसी स्थान से बंधे नहीं रखता।
4. Tax Benefits (कर लाभ)
खरीदने पर:
होम लोन के ब्याज और मूलधन पर आयकर छूट मिलती है (Section 80C और Section 24)।
यह लाभ आपकी EMI की प्रभावी लागत कम कर सकता है।
किराए पर रहने पर:
HRA (House Rent Allowance) पर कर छूट मिलती है, जो आपकी कर बचत में मदद करती है।
5. निर्णय का सूत्र
खरीदें अगर:
आप घर में स्थायित्व चाहते हैं और वित्तीय रूप से तैयार हैं।
आपका EMI आपकी बचत और खर्चों के बीच संतुलन बिगाड़े बिना फिट हो सकता है।
किराए पर रहें अगर:
आप अधिक बचत और निवेश से लंबे समय में बेहतर रिटर्न चाहते हैं।
आपका जीवन अभी स्थिर नहीं है (नौकरी या स्थान परिवर्तन की संभावना)।
6. Final Thought :
किराया और निवेश की रणनीति: अगर आप Discipline से निवेश कर सकते हैं और अपने वित्त को नियंत्रित रख सकते हैं, तो किराए पर रहना और निवेश करना अधिक लाभदायक हो सकता है।
घर खरीदना: अगर आप "अपना घर" चाहते हैं और अपनी स्थिति के लिए यह आर्थिक रूप से उपयुक्त है, तो खरीदने से मानसिक और भावनात्मक संतुष्टि मिलती है।
आपकी प्राथमिकताओं और जरूरतों के अनुसार यह फैसला लें।
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Practical Formula and Tips for Decision Making.
1. (Rent vs Buy Ratio) Explained
Rent vs Buy निर्णय के लिए एक सरल सूत्र है:
वार्षिक किराया × 20 = प्रॉपर्टी की कीमत
कैसे उपयोग करें?
A. वार्षिक किराया निकालें:
आपके मासिक किराए को 12 से गुणा करें।
उदाहरण: यदि आपका मासिक किराया ₹20,000 है, तो वार्षिक किराया = ₹20,000 × 12 = ₹2,40,000।
B. गुणा करें:
वार्षिक किराए को 20 से गुणा करें।
₹2,40,000 × 20 = ₹48,00,000।
C. तुलना करें:
अगर प्रॉपर्टी की कीमत ₹48 लाख से कम है, तो खरीदना बेहतर हो सकता है।
अगर प्रॉपर्टी की कीमत ₹48 लाख या उससे अधिक है, तो किराए पर रहना और बचत/निवेश करना बेहतर हो सकता है।
इसका तर्क क्या है?
किराए पर रहने के लिए कम खर्च होता है और निवेश पर मिलने वाला रिटर्न अधिक हो सकता है।
खरीदने पर होम लोन का ब्याज, मेंटेनेंस, और टैक्स जैसे खर्च जोड़ने पर प्रॉपर्टी महंगी हो जाती है।
2: 5% Rule for Renting
यदि घर खरीदने की लागत की तुलना में किराया खरीदने की लागत का 5% या कम हो, तो किराए पर रहना बेहतर है।
कैसे?
घर खरीदने की लागत = होम लोन का ब्याज, टैक्स, मेंटेनेंस।
किराए पर रहने की लागत = वार्षिक किराया।
उदाहरण:
अगर घर की कीमत ₹50 लाख है और इसका 5% = ₹2.5 लाख।
अगर सालाना किराया ₹2 लाख है, तो किराए पर रहना बेहतर है।
(Why 5%? Find the answer at the end of this article under Note section (B)
3. Price-to-Rent Ratio (P/R Ratio)
P/R Ratio = प्रॉपर्टी की कीमत ÷ वार्षिक किराया
P/R Ratio < 20: घर खरीदना फायदेमंद।
P/R Ratio > 20: किराए पर रहना बेहतर।
उदाहरण:
अगर घर की कीमत ₹60 लाख है और वार्षिक किराया ₹2.5 लाख।
P/R Ratio = ₹60 लाख ÷ ₹2.5 लाख = 24
निष्कर्ष: किराए पर रहना अधिक लाभदायक।
4. Total Cost of Ownership (TCO)
घर खरीदते समय केवल कीमत पर ध्यान न दें।
TCO = EMI + Maintenance + Taxes + Insurance का ध्यान रखें।
उदाहरण:
अगर EMI = ₹30,000/माह, मेंटेनेंस = ₹2,000/माह, और अन्य खर्च ₹5,000/माह।
TCO = ₹30,000 + ₹2,000 + ₹5,000 = ₹37,000/माह।
तुलना करें: अगर किराया ₹25,000 है, तो किराए पर रहना सस्ता हो सकता है।
5. Investment Opportunity Cost
किराए पर रहकर आप जितनी बचत करते हैं, उसे निवेश करें।
उदाहरण: अगर EMI ₹40,000 है और किराया ₹20,000, तो ₹20,000 को म्यूचुअल फंड में SIP करें।
लाभ: 12% रिटर्न पर 20 साल में ₹1.9 करोड़ बन सकते हैं।
6. Break-Even Analysis
यह पता लगाने में मदद करता है कि घर खरीदने पर आपकी लागत कितने वर्षों में किराए पर रहने की लागत के बराबर हो जाएगी।
Break-Even Years = (प्रॉपर्टी की कीमत - डाउन पेमेंट) ÷ (वार्षिक किराया - वार्षिक EMI बचत)
उदाहरण:
प्रॉपर्टी की कीमत: ₹50 लाख।
डाउन पेमेंट: ₹10 लाख।
लोन राशि: ₹40 लाख।
वार्षिक किराया: ₹2,50,000।
EMI बचत: ₹1,51,500 (calculation given in the End of this Article (A))
Break-Even Years = (₹50 लाख - ₹10 लाख) ÷ (₹2,50,000 - ₹1,51,500)
= ₹40 लाख ÷ ₹98,500
= 40.6 साल।
निष्कर्ष:
अगर ब्रेक-ईवन साल बहुत ज्यादा (जैसे यहाँ 40.6 साल) आ रहे हैं, तो घर खरीदने से बेहतर है किराए पर रहकर निवेश करना।
अगर आपका EMI और किराए का अंतर कम हो, तो घर खरीदना सही हो सकता है।
अगर ब्रेक-ईवन अवधि लंबी है (जैसे 25-30 साल), तो किराए पर रहना बेहतर हो सकता है।
EMI बचत का उपयोग कब करें?
1. घर खरीदने से बचें अगर:
EMI और किराए में बड़ा अंतर हो।
बचत को आप व्यवस्थित निवेश में लगा सकते हैं।
2. घर खरीदें अगर:
EMI और किराए में अन्तर कम हो।
प्रॉपर्टी की कीमत तेजी से बढ़ रही हो।
आप स्थिरता और "अपना घर" चाहते हैं।
निष्कर्ष: EMI बचत निकालने के बाद यह तय करना आसान हो जाता है कि किराए पर रहकर निवेश करें या घर खरीदें। आपका निर्णय आपकी बचत क्षमता, निवेश अनुशासन, और प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।
6. Emotional vs Financial Decision
भावनात्मक दृष्टिकोण:
अगर "अपना घर" होने से आपको खुशी मिलती है, तो यह सिर्फ पैसे का सवाल नहीं है।
आर्थिक दृष्टिकोण:
अगर आपका उद्देश्य धन का निर्माण है, तो किराए पर रहकर निवेश पर ध्यान दें।
7. Tax Benefits को शामिल करें
होम लोन पर टैक्स लाभ (₹2 लाख ब्याज पर Section 24 और ₹1.5 लाख मूलधन पर Section 80C)।
किराए पर रहने वालों के लिए HRA का लाभ।
8. Real Estate Trends पर नजर रखें
अगर आपके शहर में प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, तो खरीदना फायदेमंद हो सकता है।
अगर कीमतें स्थिर या गिरावट पर हैं, तो किराए पर रहना बेहतर है।
निष्कर्ष:
हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है। सही निर्णय के लिए अपनी वित्तीय स्थिति, लक्ष्य, और लाइफस्टाइल प्राथमिकताओं का ध्यान रखें। अगर आप Discipline से निवेश कर सकते हैं, तो किराए पर रहना और बचत को बढ़ाना अधिक लाभदायक हो सकता है।
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Note : Calculations :
(A) Break-Even Example में EMI बचत कैसे निकाली?
प्रॉपर्टी की कीमत: ₹50 लाख।
डाउन पेमेंट: ₹10 लाख।
लोन राशि: ₹40 लाख।
Annual interest Rate : 8%
Loan Tenure : 20 साल
वार्षिक किराया: ₹2.5 लाख।
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EMI Calculation in Detail:
1. EMI फॉर्मूला:
EMI = [P × r × (1+r)^n] ÷ [(1+r)^n – 1]
Monthly Interest Rate (r): 8% ÷ 12 = 0.00667।
Loan Tenure (n): 20 साल = 240 महीने।
EMI = ₹33,458 (लगभग)।
2. Total Annual EMI :
₹33,458 × 12 = ₹4,01,500।
यह लोन चुकाने पर आपका सालाना खर्च होगा।
3. EMI बचत = वार्षिक EMI खर्च - वार्षिक किराया
₹4,01,500 - ₹2,50,000 = ₹1,51,500
(B) 5% का नियम (5% Rule for Renting) एक साधारण Thumb Rule है जो रियल एस्टेट में औसत खर्च और निवेश की तुलना करने के लिए बनाया गया है। यह किसी संपत्ति को खरीदने और किराए पर रहने के बीच तुलना को सरल बनाता है। 5% का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यह ज्यादातर प्रॉपर्टी के Ownership Costs को कवर करता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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5% Rule क्यों 5% ही है?
1. Ownership Costs का प्रतिनिधित्व
जब आप प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो आपकी लागत केवल EMI तक सीमित नहीं होती। इसमें अन्य खर्च भी शामिल होते हैं:
1. Property Tax: आमतौर पर प्रॉपर्टी वैल्यू का 1%-2%।
2. Maintenance Costs: लगभग 1%-2% सालाना।
3. Insurance: लगभग 0.5%-1%।
4. Opportunity Cost: डाउन पेमेंट की निवेश की गई राशि पर मिलने वाला रिटर्न।
👉 ये खर्च मिलकर औसतन प्रॉपर्टी के मूल्य का 5% सालाना बनते हैं। इसलिए, यह एक मानक संख्या के रूप में लिया गया है।
2. Practical और Universal संख्या
5% एक साधारण और याद रखने में आसान मानक है।
यह विकसित देशों और भारत जैसे देशों के बीच संपत्ति से जुड़े औसत खर्चों को संतुलित करता है।
कुछ बाजारों में यह 4%-6% के बीच हो सकता है, लेकिन 5% औसत है।
3. अल्टरनेट नंबर्स क्यों नहीं?
4% या उससे कम: यह केवल अत्यधिक कम-खर्च वाली प्रॉपर्टी के लिए सही हो सकता है।
6% या उससे ज्यादा: यह केवल महंगे रखरखाव या टैक्स वाले इलाकों में लागू होगा।
👉 5% एक संतुलित संख्या है, जो अधिकांश क्षेत्रों और प्रॉपर्टीज के लिए सटीक तुलना देती है।
5% Rule कैसे काम करता है?
फॉर्मूला:
(Property Price × 5%) ÷ 12 = मासिक रेंट का टारगेट
उदाहरण:
Property Price: ₹50 लाख।
5% Ownership Cost: ₹50 लाख × 5% = ₹2.5 लाख/साल।
मासिक Ownership Cost: ₹2.5 लाख ÷ 12 = ₹20,833।
क्या करें?
अगर किराया ₹20,833/माह से कम है, तो किराए पर रहना फायदेमंद हो सकता है।
अगर किराया ₹20,833/माह से ज्यादा है, तो घर खरीदने पर विचार करें।
5% Rule के फायदे
1. साधारण और प्रभावी तुलना: खरीदने और किराए पर रहने के बीच जल्दी निर्णय लेने में मदद करता है।
2. Ownership Costs को ध्यान में रखता है: केवल EMI नहीं, बल्कि अन्य खर्च भी शामिल करता है।
3. लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस का विचार: यह दिखाता है कि क्या किराए पर रहने से आप निवेश से ज्यादा फायदा कमा सकते हैं।
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5% Rule कब लागू नहीं होता?
1. अगर आप इमोशनल वैल्यू के लिए घर खरीद रहे हैं।
2. प्रॉपर्टी की कीमत या किराया बाजार के सामान्य रुझानों से बहुत अलग है।
3. अगर आपकी प्राथमिकता केवल निवेश की बजाय स्थिरता (stability) है।
निष्कर्ष
5% एक औसत और व्यापक रूप से स्वीकृत नंबर है, जो प्रॉपर्टी खरीदने और किराए पर रहने के निर्णय को तर्कसंगत बनाता है। हालांकि, इसे अपनी व्यक्तिगत परिस्थिति और स्थानीय बाजार के आधार पर समायोजित करें।
(C) Other Example to Calculate Total Effective EMI and EMI बचत.
EMI बचत (EMI Savings) निकालने का मतलब है यह पता लगाना कि घर खरीदने की स्थिति में आपकी मासिक EMI और किराए पर रहने की मासिक लागत के बीच कितना अंतर है। इस अंतर को आप बचत और निवेश के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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EMI बचत निकालने का फॉर्मूला
EMI बचत = मासिक EMI - मासिक किराया
Example 1: Basic Calculation
मान लीजिए, आप ₹50 लाख का घर खरीदना चाहते हैं।
होम लोन ब्याज दर = 8% प्रति वर्ष
लोन अवधि = 20 साल
मासिक किराया = ₹20,000
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EMI निकालने के लिए फॉर्मूला है:
EMI = [P × r × (1+r)^n] ÷ [(1+r)^n – 1]
EMI Calculation
लोन राशि (P) = ₹50 लाख।
वार्षिक ब्याज दर = 8% = 0.08
मासिक ब्याज दर (r) = 8% ÷ 12 = 0.00667।
लोन अवधि (n) = 20 साल = 20 × 12 = 240 महीने।
EMI = [50,00,000 × 0.00667 × (1+0.00667)^240] ÷ [(1+0.00667)^240 – 1]
EMI = ₹41,822 (लगभग)
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अतिरिक्त खर्च जो EMI में जोड़े जाने चाहिए
घर खरीदने पर EMI के अलावा अन्य खर्च भी होते हैं, जो EMI को प्रभावी रूप से बढ़ा देते हैं, इसको हम Total Effective EMI बोलते हैं :
1. मेंटेनेंस (Maintenance): हर महीने सोसायटी मेंटेनेंस या रखरखाव का खर्च।
उदाहरण: ₹2,000-₹5,000/माह।
2. प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax): सालाना भुगतान।
उदाहरण: ₹10,000-₹30,000/वर्ष।
3. बीमा (Insurance): होम लोन और घर का बीमा।
उदाहरण: ₹5,000-₹10,000/वर्ष।
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Total Effective EMI (TE-EMI)
TE-EMI = EMI + Maintenance + Insurance + Property Tax
EMI = ₹41,822।
मेंटेनेंस = ₹3,000/माह।
प्रॉपर्टी टैक्स = ₹20,000/वर्ष = ₹1,667/माह।
बीमा = ₹10,000/वर्ष = ₹833/माह।
TE-EMI = ₹41,822 + ₹3,000 + ₹1,667 + ₹833 = ₹46,322।
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Final EMI Saving (बचत) Calculation :
मासिक किराया = ₹20,000।
TE-EMI = ₹46,322।
EMI बचत:
TE-EMI - किराया = ₹46,322 - ₹20,000 = ₹26,322।
अगर आप घर नहीं खरीदते और किराए पर रहते हैं, तो आप ₹26,322/माह बचा सकते हैं।
इस बचत को निवेश में कैसे उपयोग करें?
SIP या Mutual Funds में निवेश करें:
₹26,322 को 20 वर्षों तक SIP में निवेश करें।
औसत रिटर्न = 12%।
20 साल बाद आपका निवेश = ₹2.4 करोड़ (लगभग)।
Comparison:
घर खरीदने पर आपके पास 20 साल बाद प्रॉपर्टी होगी।
किराए पर रहकर निवेश करने पर आपके पास ₹2.4 करोड़ नकद संपत्ति हो सकती है।
EMI बचत का उपयोग कब करें?
1. घर खरीदने से बचें अगर:
EMI और किराए में बड़ा अंतर हो।
बचत को आप व्यवस्थित निवेश में लगा सकते हैं।
2. घर खरीदें अगर:
EMI और किराए में अन्तर कम हो।
प्रॉपर्टी की कीमत तेजी से बढ़ रही हो।
आप स्थिरता और "अपना घर" चाहते हैं।
निष्कर्ष: EMI बचत निकालने के बाद यह तय करना आसान हो जाता है कि किराए पर रहकर निवेश करें या घर खरीदें। आपका निर्णय आपकी बचत क्षमता, निवेश अनुशासन, और प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।

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